Thursday, June 21, 2018
लोकगीतों को जन-जन तक पहुंचाना चाहती हूं- संजोली
हर्ष राज
संवाददाता

युवा लोक गायिका संजोली पाण्डेय अवधी और भोजपुरी संगीत जगत की एक जानी-पहचानी नाम हैं । हाल ही में एन.एफ.जी. ने उनसे एक खास मुलाकात की । प्रस्तुत हैं संजोली से हुई बातचीत के कुछ खास अंश -



एन.एफ.जी. - गायकी की ओर आपका रुझान कब से और कैसे हुआ ?
    
संजोली -   मेरी माँ बताती है कि बचपन से ही मेरा रुझान गायकी की ओर था । इसके बाद पेशेवर ढंग से मैंने संगीत का सफ़र उस वक्त शुरु किया जब मैं दसवी कक्षा में थी । अपने परिवार, अध्यापकों और दोस्तों के सपोर्ट से मेरा संगीत का सफर शुरु हुआ । उन सभी ने कहा कि प्रतियोगिताओं में हिस्सा लो और आगे बढ़ो फिर मैंने हिस्सा लेना शुरु किया बहुत सारे पुरस्कार भी जीते तो हौसला बढ़ता गया । बचपन से लोकगीतों को जब भी सुनती थी तब सोचती थी की आखिर ऐसा क्या है लोकगीतों में जो मैं नहीं गा सकती फिर मैंने अपनी माँ से उसे सीखा और फिर इस क्षेत्र में अपना कदम आगे बढ़ाया |




एन.एफ.जी.
- गायन की विधिवत शिक्षा-दीक्षा कहां से ली आपने ?
       
संजोली -   मेरी पहली गुरु मेरी माँ हैं। लोकगीतों की शिक्षा मुझे माँ से मिली । एक अच्छी सिंगर बनने के लिए शास्त्रीय संगीत सीखना बहुत जरुरी है तो मैंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा भातखण्डे संगीत संस्थान जो कि लखनऊ में हैं वहा से शास्त्रीय संगीत सीखा । आज भी संगीत की शिक्षा मेरी गुरु माँ श्रीमती सीमा भरद्वाज जी से ले रही हूं ।





एन.एफ.जी. -  जब कभी भी आप परफॉर्म करने जाती हैं तो उस वक्त आपके मन में क्या कुछ चल रहा होता है ?
 
संजोली -  बहुत सारे इवेंट्स हो रहे हैं आज कल ,मिसाल के तौर पर शास्त्रीय और वेस्टर्न । मैं जब भी मंच पर जाती हूं , पहले यही सोचती हूँ कि अपने लोक गीतों को ,अपनी लोक विधाओं को जन-जन तक पहुंचाना है । किसी भी मामले में अपनी संस्कृति अपनी परम्परा कमजोर ना पड़े इसके बारे में सोचती हूं ।





एन.एफ.जी. -  आपके जीवन में अब तक का सबसे खुशनुमा पल कौन सा रहा ?
 
संजोली -  वैसे तो मेरी जिंदगी का हर पल खुशनुमा रहा है क्योंकि मैं हर पल कुछ न कुछ सीखने की चाह रखती हूं और हर पल को ख़ुशी से जीती हूँ । हाँ, ये होता है की कोई एक पल बहुत यादगार होता है । मेरा यादगार पल वो था जब मुझे मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए बुलाया गया और पहली बार मेरे नाम के आगे लोकगायिका शब्द जुड़ा ।





एन.एफ.जी.
-  जब कभी आपको खाली समय मिलता है तो आप क्या करना पसंद करती हैं ?
 
संजोली
-   जब भी मुझे खाली समय मिलता है, मैं रियाज़ करती हूँ । इसके बाद भी अगर समय मिलता है तो  मैं कुकिंग करती हूं । मुझे कुकिंग का बहुत शौक है। खाने की भी बहुत शौकीन हूँ । खाना बनाना और लोगों को  खिलाना पसंद करती हूँ  |





एन.एफ.जी. 
- आगे की क्या प्लानिंग्स हैं आपकी, फ्यूचर में और क्या करना चाहती हैं आप ?
 
संजोली -  आगे की प्लानिंग ये है कि भोजपुरी गानों को एक अच्छी छवि की ओर ले जाना है। साथ ही भोजपुरी गानों और अपने लोक गीतों को घर-घर तक पंहुचा पाऊं ,ऐसी कोशिश करती हूं । साथ ही लोक गीतों के कुछ ऐसे एलबम्स निकालूं जो घर घर में बजाए जाएं और लोग उसे सुनना पसन्द करें |


संजोली की गायिकी को सुनें - http://www.youtube.com/watch?v=LQxM-ehNfCE
 

एन.एफ.जी.
-  आप खुद युवा हैं । आपने कम वक्त में अच्छा मुकाम हासिल किया है। आप क्या सन्देश देना चाहेंगी आज के जमाने के युवा पीढ़ी को ?
 
संजोली -      इस देश की युवा पीढ़ी को मैं यही बोलना चाहूंगी कि आप मॉडर्न बनिए और बेशक पाश्चात्य सभ्यता को अपनाइये लेकिन अपनी संस्कृति और सभ्यता को मत भूलिए । अपने माता पिता का सम्मान करिये और उनका नाम रौशन कीजिए |



 

 

लोक गायिका संजोली पांडे की गायिकी पर लिखिये अपनी राय ।


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