Tuesday, August 21, 2018
एक स्मार्ट विलेज की कहानी
अभिषेक शर्मा
वरिष्ठ पत्रकार

हैदराबाद : भारतीय पंचायती राज व्यवस्था में शक्तियां पंचायतों में निहित रही हैं। इन्हीं शक्तियों का प्रयोग कर तेलंगाना राज्य के वारंगल जिले के गंगादेवी पल्ली ने विश्व भर में अपनी पहचान बनाई है। स्थिति यह हो गई है कि गांव में घूमने आने वालों से ग्राम प्रबंधन एक निश्चित रकम भी लेता है। इसके अतिरिक्त भी अन्य आय के जरिये से गांव के विकास कार्यों के लिए लोग स्वयं धन की व्यवस्था कर गांव की तरक्की में योगदान दे रहे हैं।





सहभागिता ने दी जमीन

कुछ दशकों पहले गांव नक्सल प्रभावित था मगर जागरूकता ने जब पांव पसारे तो स्वयं सहायता समूहों का गठन हुआ। 406 परिवार में कुल 1452 सदस्य है जबकि 26 कमेटी में 200 लोग विभिन्न पदों पर जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यहां खुले में शौच जाने पर पांच सौ रुपये सर्वाधिक जुर्माना तय किया गया है।


       

गांव में नियम कानून सख्त होने से यहां के लोग दो दशकों से थाना कोर्ट कचहरी


नही जा रहे। हम जल संरक्षण के प्रति काफी सजग और जवाबदेह  हैं,मैंने खुद डेढ़ सौ


रुपये पानी की बर्बादी से दो बार जुर्माना भरा है - राजामौली, मुखिया, गंगा देवी


पल्ली



सभी घरों में खुद का शौचालय है, गांव में वाई फाई कनेक्टिविटी, सीसीटीवी, केबल कनेक्शन भी गाँव वालों के सहयोग से ही है। ऊर्जा की अधिकतर जरूरत सौर ऊर्जा के जरिये उत्पादित हो रही है।





जल से बनाया कल

गांव में गैर सरकारी संगठन के सहयोग से जल शुद्ध करने का प्लांट लगाया गया है। जहां वाटर एटीएम कार्ड से एक रुपये में बीस लीटर पीने का उपचारित जल मिलता है। वर्षा जल संचयन के लिये गहरी नालियां जल संचय स्थल से जुड़ी हैं। वाटर प्लांट खुद गांव की ही इकाई संचालित करती है और रोजगार के अवसर भी प्रदान करती है।




जल संकट हमने झेला है तो पानी की कीमत पहचानते हैं - साम्बा लक्ष्मी,गांव निवासी



गांव को सम्मान से पहचान

गांव को निर्मल ग्राम पुरस्कार सहित गूगल की ओर से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा भी सरकार और प्रशासन की ओर से जल संरक्षण और संचयन सहित विकास के प्रयासों को सम्मानित किया जा चुका है। सम्मान में प्राप्त धनराशि से भी गाँव में विकास के अन्य कार्यों को गांव की कमेटी के जरिये अंजाम दिया जा रहा है।

 

 

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रघोत्तम शुक्ल
उत्तम लेख।