Tuesday, January 23, 2018
थैंक्यू माई लॉर्ड
संजय कुमार
अधिवक्ता एवं पत्रकार

सुप्रीम कोर्ट ने इस साल कई बड़े फैसले किए हैं । इस साल निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित करने, ट्रिपल तलाक पर रोक, नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध को रेप करार देने , निर्भया गैंगरेप के दोषियों को फांसी की सजा मुकर्रर करने, चुनाव में धर्म के इस्तेमाल पर रोक, प्रदूषण फैलानेवाली बीएस-3 वाहनों की बिक्री और उत्पादन पर रोक के अलावा इस साल बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली-एनसीआर में दीपावली में पटाखों की बिक्री पर बैन लगाने जैसे ऐतिहासिक फैसले किए हैं । इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के एक सिटिंग जज को सजा देने, आय से अधिक संपत्ति के मामले में शशिकला को सजा देने और बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को हटाने का फैसला दिया । आइए एक नजर डालते हैं उनक फैसलों पर-


निजता का अधिकार



सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान बेंच ने सर्वसम्मति से निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार करार दिया । नौ जजों ने छह अलग-अलग फैसले दिए हैं लेकिन सबने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना। इस संविधान बेंच की अध्यक्षता तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने की थी। 547 पेजों के इन फैसलों में कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार को धारा 21 और खंड तीन के तहत सुरक्षित किया गया है। चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस आरके अग्रवाल, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एस अब्दुल नजीर ने 266 पेजों का फैसला एक साथ लिखा है ।




जस्टिस जे चेलमेश्वर ने 44 पेजों का, जस्टिस एसए बोब्डे ने 40 पेजों का, जस्टिस आरएफ नरीमन ने 122 पेजों का, जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने 24 पेजों का जबकि जस्टिस संजय किशन कौल ने 47 पेजों का फैसला सुनाया था । इस साल 24 अगस्त को ये फैसला सुनाया गया था।


ट्रिपल तलाक



सुप्रीम कोर्ट में अपने ऐतिहासिक फैसले में ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक करार दिया है । पांच जजों की संविधान बेंच ने ये फैसला बहुमत से दिया । इस बेंच की अध्यक्षता कर रहे तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर खुद अल्पमत में थे । जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस आरएफ नरीमन ने इसे असंवैधानिक करार दिया जबकि चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर ने इसे संसद में कानून बनाने के लिए छोड़ा । जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस आरएफ नरीमन ने कहा कि ट्रिपल तलाक संविधान की धारा 14 का उल्लंघन करती है ।



इनके मुताबिक धारा 14 समानता का अधिकार देता है । सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रिपल तलाक संवैधानिक नैतिकता और पब्लिक ऑर्डर का उल्लंघन करती है ।


                                                      चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर ने कहा कि ट्रिपल तलाक मुस्लिम पर्सनल लॉ का महत्वपूर्ण हिस्सा है । चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि तलाक-ए-बिद्दत संविधान की धारा 14,15,21 और 25 का उल्लंघन नहीं है । कहा कि ट्रिपल तलाक को तुरंत खत्म नहीं किया जा सकता है । सुन्नी समुदाय इसका पिछले एक हजार वर्षों से उपयोग करता रहा है । हालांकि चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर ने ये माना कि ट्रिपल तलाक पाप है इसलिए सरकार को इसमें दखल देना चाहिए और उसे कानून बनाना चाहिए ।

निर्भया गैंगरेप


सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में निर्भया गैंगरेप के चारों अभियुक्तों की फांसी की सजा पर मुहर लगाई ।  फैसला दो खंडों में आया था लेकिन दोनों में ही फांसी की सजा पर मुहर लगाई गई । जब जज चारो अभियुक्तों को फांसी की सजा पर मुहर लगाने का फैसला सुना रहे थे तो कोर्ट में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर फैसले का स्वागत किया ।
             
                                                        जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण ने 315 पेजों का फैसला दिया है जबकि जस्टिस आर भानुमति ने 114 पेजों का फैसला दिया है। फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेक्स और हिंसा की भूख के चलते बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया ।


जिस तरह का अपराध हुआ ऐसा लगता है कि ये दूसरे दुनिया की कहानी है । सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कोई गलती नहीं की है। जस्टिस आर भानुमति ने जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण के फैसले से सहमति जताते हुए जस्टिस आर भानुमति ने महिलाओं के खिलाफ अपराध पर चिंता जताई । सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दोषी करार दिए गए मुकेश के रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई पूरी कर ली है । बाकी तीन दोषियों पवन, विनय और अक्षय के रिव्यू पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट 22 जनवरी को सुनवाई करेगी।


नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध रेप है



सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में 15 से 18 वर्ष से कम की नाबालिगों के साथ पतियों द्वारा बनाए जबरन यौन संबंध को रेप करार दिया है । बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर चोट करते हुए जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अपवाद 2 को संविधान की धारा 14 और 21 का उल्लंघन माना है । सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि इस फैसले का प्रभाव आगे से होगा ।




 इसके पहले की गई शादियां इससे प्रभावित नहीं होंगी । इसका मतलब ये है कि फैसला किए जाने के दिन (11 अक्टूबर 2017) के बाद से 15 से 18 वर्ष की नाबालिगों के साथपतियों द्वारा जबरन बनाया गया यौन संबंध रेप माना जाएगा । सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर एक साल के अंदर कोई नाबालिग पत्नी जबरन यौन संबंध की शिकायत करती है तो पुलिस को कार्रवाई करने की जरुरत है ।

                                               अपने 70 पेजों के फैसले में जस्टिस मदन बी लोकुर ने कहा कि बाल विवाह एक बड़ा मसला है लेकिन कोर्ट वैवाहिक रेप पर नहीं जाएगा । जबकि जस्टिस दीपक गुप्ता ने अपने 57 पेजोंके फैसले में कहा कि देशभर में बाल विवाह हो रहे हैं और ये मामला पोक्सो का है ।


चुनाव में धर्म का इस्तेमाल नहीं



सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय संविधान बेंच ने फैसला किया है कि चुनाव में धर्म का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है । संविधान बेंच ने 4-3 के बहुमत से ये फैसला किया था । तत्कालीन चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि कोई उम्मीदवार अपने या विरोधी उम्मीदवार के धर्म, जाति या भाषा का इस्तेमाल चुनाव में नहीं कर सकता है । सात जजों में से चार जजों ने कहा कि चुनाव में धर्म का इस्तेमाल नहीं हो सकता । जबकि तीन जजों ने इससे असहमति जताई । सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव एक धर्मनिरपेक्ष कार्य है । इसमें धर्म का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है ।

                                                 कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति का भगवान से संबंध निजी मामला है और इसमें राज्य का दखल नहीं होना चाहिए ।


दीपावली के दौरान पटाखों पर बैन


दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने इस साल दीपावली के दौरान पटाखों की बिक्री पर बैन लगा दिया। हालांकि कोर्ट ने दीपावली के बाद दिल्ली एनसीआर में पटाखों की बिक्री की अनुमति दे दी थी ।  अपने आदेश में जस्टिस एके सिकरी, जस्टिस अभय मनोहर सप्रे और जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि वो ये देखना चाहते हैं कि इस बार दीपावली पर हालात कैसे रहते हैं ।




याचिका अर्जुन गोपाल ने दायर की थी और उन्होंने 12 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली एनसीआर में शर्तों के साथ पटाखा बेचने के फैसले को वापस लेने की मांग की थी । याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकरनारायण ने कोर्ट से कहा था कि पटाखों पर पिछले साल नवंबर में लगाए गए बैन के आदेश को लागू किया जाना चाहिए । अर्जुन गोपाल ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूरी तरह पाबंदी लगाने की मांग करने वाली याचिका दायर की है । इस याचिका पर कोर्ट इस मामले पर जनवरी में सुनवाई करेगी


बीसीसीआई के अध्यक्ष और सचिव को हटाया


सुप्रीम कोर्ट ने इस वर्ष की शुरुआत में ही 2 जनवरी को बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सेक्रेटरी अजय शिर्के को हटा दिया था । उनके खिलाफ यह कार्रवाई बीसीसीआई में सुधारों की राह में बाधा डालने के लिए की गई थी । सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई में सुधार और भ्रष्टाचार को खत्म करने के तरीके सुझाने के लिए बनाई गई लोढ़ा समिति की ज्यादातर सिफारिशों को 18 जुलाई को स्वीकार कर लिया था। लेकिन बीसीसीआई को समिति की कई सिफारिशें मंजूर नहीं थीं।

                                                      जस्टिस आरएम लोढ़ा के नेतृत्व में तीन सदस्यों वाली समिति की सिफारिशों में बीसीसीआई के पदाधिकारियों के लिए उम्र की सीमा तय करने के साथ साथ उनके कार्यकाल की अवधि को भी सीमित किया गया है।


समिति का यह भी सुझाव है कि किसी व्यक्ति को लगातार दो बार पद पर नियुक्त न किया जाए ।


आय से अधिक संपत्ति के मामले में शशिकला दोषी करार


पिछले 14 फरवरी को आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए शशिकला को दोषी करार दिया । इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने चार साल के जेल की सजा सुनाई थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगाई । कोर्ट ने शशिकला, इलावरसी और सुधाकरन तीनों को चार चार साल की जेल और तीनों पर दस दस करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है । कोर्ट के इस फैसले की वजह से ही शशिकला मुख्यमंत्री नहीं बन पाईं । वे अगले दस साल तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकतीं । जस्टिस पीसी घोष और जस्टिस अमिताभ चाय की बेंच ने करीब एक हजार पन्नों का फैसला सुनाया था । कोर्ट ने जयललिता के दिवंगत हो जाने के चलते उनका मामला खत्म किया गया ।

                                        फैसला सुनाते समय कोर्ट ने बढ़ते भ्रष्टाचार पर चिंता जाहिर की है । आपको बता दें कि इस मामले पर शशिकला ने रिव्यू पिटीशन भी दाखिल की थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।


केरल लव जिहाद मामला



केरल के लव जिहाद मामले में अभी अंतिम फैसला आना बाकी है । इस मामले पर लड़की हदिया से सवाल पूछने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसे तमिलनाडु के सलेम जिले में स्थित शिवराज होम्योपैथिक कॉलेज में पढ़ाई जारी रखने के लिए जाने का आदेश दिया । कोर्ट ने कॉलेज के डीन को उसका स्थानीय अभिभावक नियुक्त किया । कोर्ट ने कहा था कि ये कोर्स 11 महीने का है और हदिया के साथ कॉलेज वैसे ही पेश आएगी जैसे बाकी छात्रों के साथ । हदिया कॉलेज के हॉस्टल में रहेगी और हॉस्टल के नियमों का पालन करेगी ।

                                                      सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेज के डीन को आदेश दिया कि अगर कोई समस्या आती है तो वो सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं ।  मामले की सुनवाई जनवरी के तीसरे सप्ताह में होगी । ये मामला इतना पेचीदा है कि खचाखच भरे कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा था कि हमने आज तक ऐसे मामले पर कभी सुनवाई नहीं की है । सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं हदिया से जब सुप्रीम कोर्ट ने ये पूछा कि आपके भविष्य का सपना क्या है तो हदिया ने कहा कि वो स्वतंत्रता चाहती है । चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने जब पूछा कि क्या आप सरकार के खर्च से अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हो तो हदिया ने जवाब दिया कि पढ़ाई जारी रखना चाहती हूं लेकिन जब हमारे पति हमारा ध्यान रखने के लिए हैं तो सरकार के खर्च पर नहीं । कोर्ट ने पूछा कि क्या आप पढ़ाई के लिए वापस जाना चाहती हो तब हदिया ने कहा कि वो अपने पति को देखना चाहती है । उसे विश्वविद्यालय में एक स्थानीय अभिभावक की जरुरत होगी । तब कोर्ट ने कहा कि हम कॉलेज के डीन को अभिभावक नियुक्त कर देंगे । तब हदिया ने कहा कि हम केवल अपने पति को अभिभावक के रुप में चाहती हूं किसी और को नहीं ।


जस्टिस कर्णन को जेल की सजा



9 मई 2017 को एक ऐतिहासिक घटना हुई । सुप्रीम कोर्ट ने देश के इतिहास में पहली बार किसी हाईकोर्ट के सिटिंग जज को सजा सुनाई । कोलकाता हाईकोर्ट के जज जस्टिस कर्णन को कोर्ट की अवमानना कार्यवाही दोषी मानते हुए उन्हें छह माह के जेल की सजा सुनाई । जस्टिस कर्णन पिछले 20 जून को गिरफ्तार हुए थे और पिछले 20 दिसंबर को उन्हें रिहा कर दिया गया ।
                                                           
                                                          सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अगर जस्टिसकर्णन को जेल नहीं भेजा जाएगा तो ये संदेश जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट ने जज द्वारा किए गए अवमानना को माफ कर दिया। आपको बता दें कि जस्टिस कर्णन ने आठ मई को चीफ जस्टिस समेत सात जजों को एससीएसटी एक्ट के प्रावधानों के तहत दोषी करार देते हुए पांच साल की सजाका आदेश दिया था ।

 

 

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deepak pandey
nice