Thursday, November 15, 2018
योगी जी का सुशासन ?
आशुतोष शुक्ला
संपादक,न्यूज फ़ॉर ग्लोब

देश की राजधानी दिल्ली से सटा यूपी का गौतमबुद्ध नगर जिला,एक अजीब से विरोधाभासों से भरी बड़ी अद्भुद जगह है । यहां यूपी का कोई मुख्यमंत्री दौरा करने आना नहीं चाहता और इस जिले में तैनात कोई सरकारी अफसर यहां से जाना नहीं चाहता । दोनो की वजह एक ही है , और वो है - कुर्सी ।
  
  प्रतीकात्मक चित्र

इतिहास गवाह है कि यूपी का जो भी मुख्यमंत्री यहां दौरे पर आया उसकी कुर्सी जाती रही । गनीमत है दो बार नोएडा दौरे के बावजूद योगी जी की कुर्सी अब तक सलामत है । मुख्यमंत्रियों की ही तर्ज पर जिले में तैनात होने वाले सरकारी अफसर भी अपनी कुर्सी को लेकर हमेशा फिक्रमंद रहते हैं । सरकारी अफसरों की फिक्र मजबूत पायों वाली कुर्सी बचाने से कहीं बढ़कर है। दरअसल उनकी चिंता तो गौतमबुद्ध नगर की मलाईदार पोस्टिंग और उससे जुड़ी बेशुमार ऊपरी आमदनी को ज्यादा से ज्यादा लंबे समय तक बचाये रखने की होती है ।
 

  

                        भू माफिया द्वारा नोएडा के सेक्टर 71 में किये गये कब्जे की ताजा स्थिति

ऐसे में ये सरकारी अफसर सही की जगह ज्यादातर सुविधाजनक रास्ते वाली कार्यशैली चुनते हैं । कमजोर के मुकाबले मजबूत पक्ष के साथ ज्यादा खड़े दिखते हैं । " सही " लेकिन विवाद की आशंका वाले फैसलों को लेने से भरपूर कन्नी काटते हैं ।

 

   


                            भू माफिया द्वारा नोएडा के सेक्टर 71 में किये गये कब्जे की अप्रैल 2016 में स्थिति

ऐसे में ये सरकारी अफसर सही की जगह ज्यादातर सुविधाजनक रास्ते वाली कार्यशैली चुनते हैं । कमजोर के मुकाबले मजबूत पक्ष के साथ ज्यादा खड़े दिखते हैं । " सही " लेकिन विवाद की आशंका वाले फैसलों को लेने से भरपूर कन्नी काटते हैं । इनके लिए सही-गलत,न्याय-अन्याय,कानूनी-गैरकानूनी,ईमानदार-भ्रष्ट और ऐसे ही कई शब्दों में कोई फर्क नहीं । ये करते वही हैं जो इनको ज्यादा से ज्यादा दिन मलाईदार पद पर बने रहने के लिए उचित लगता है ।


   

                        नोएडा एथॉरिटी द्वारा ssp को बार-बार अतिक्रमण हटाने के लिए पत्र लिखे गये
                                  लेकिन पुलिस अनसुनी करती रही । ये पत्र वर्ष 2016 का है ।
 
शासन की मंशा,नीयत और निर्देश भी इनके आगे घुटने टेक देते हैं । ये बाते मैं इसलिये दावे से कह पा रहा हूं क्योंकि विगत दिनों मेरी भेंट कुछ ऐसे लोगों से हुई जो नोएडा के सेक्टर 71 के निवासी हैं । ये लोग अपने सेक्टर में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत कर रहे थे । न्यूज फॉर ग्लोब से अपनी तकलीफ साझा करते हुए शिकायतकर्ता सेक्टर 71 निवासी प्रेम सिंह ने बताया कि अप्रैल 2016 में कुछ गुंडा और भूमाफिया तत्वों ने नोएडा एथॉरिटी की कॉलोनी मेट्रो अपार्टमेंट के अंदर सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया था ।

यूपी सरकार के भू माफिया विरोधी पोर्टल पर शिकायत करें: http://jansunwai.up.nic.in/abmp.html

सिंह के मुताबिक उन्होंने तत्काल इसकी शिकायत नोएडा एथॉरिटी के अफसरों से लिखित रूप में की । इतना ही नहीं इसी रिहायशी बिल़्डिंग के कुछ निवासियों ने तो लिखित रूप में इसकी शिकायत नोएडा एथॉरिटी के सीईओ रमा रमण को हाथों तक में सौंपी लेकिन नतीजा सिर्फ एक महाशून्य से ज्यादा कुछ नहीं निकला । एथॉरिटी के अधिकारी शिकायती पत्रों को जिला सिविल प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर उछालते रहे और पुलिस-प्रशासन ऐसे अवैध कब्जों को हटाने की जिम्मेदारी नोएडा एथॉरिटी पर डालता रहा ।


          नोएडा एथॉरिटी के पास खुद का भी एक पुलिस दस्ता होता है फिर भी उसने FIR लिखवाकर
                     खानापूर्ति कर ली जबकि वे अपने पुलिस दस्ते से कब्जे को हटवा सकते थे ।


शिकायतकर्ताओं में से एक रविन्द्र राणा ने क्षोभ भरे अंदाज में बताया कि एथॉरिटी की तरफ से महज एक एफआईआर थाना फेज 3 में दर्ज करवाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई । इसके बाद बलिहारी है नोएडा पुलिस की जिसने दो साल बीत जाने के बाद भी एफआईआर पर कुछ नहीं किया और भूमाफिया लोग कब्जा करके गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं ।




                        जिले में हुए अवैध कब्जे हटवाने का प्रथम दायित्व DM का होता है लेकिन एथॉरिटी की ओर से
                                        बार-बार लिखे जाने के बावजूद वे कानो में तेल डाले बैठे रहे ।


शिकायतकर्ताओं ने बताया कि इन दो वर्षों में दर्जनों बार वे पुलिस और प्रशासन के अफसरों मसलन डीएम,सिटी मजिस्ट्रेट और एसएसपी,सीओ से मिलते रहे लेकिन सिवाय आश्वासनों और बेरुखी के उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ । हद तो तब पार हो गई जब शिकायतकर्ताओं का दबाव बढ़ता देख पुलिस ने उलटे
उन्हें ही एक बेबुनियाद और झूठे मामले में फंसा दिया । 
इसके बाद सरकारी जमीन कब्जाने वालों के हौसले बुलंद हो गये । जो कब्जा साल 2016 में करीब सौ वर्ग फुट का था वो बढ़ते-बढ़ते साल 2018 तक 500 वर्ग फुट से भी ज्यादा हो गया और सीमेंन्टेड भी ।




इस नोटिस को चस्पा करने के साथ ही नोएडा एथॉरिटी ने अपने कर्तव्यों के समापन की घोषणा कर दी । गौर से देखें ये नोटिस साल 2016 का है और कब्जा आज तक न सिर्फ बरकरार है बल्कि विस्तारित और सीमेन्टेड भी हो चुका है ।

शिकायतकर्ताओं ने आगे बताया कि योगी सरकार के गठन और शासन के भू माफिया विरोधी एजेंडे से उन्हें उम्मीद जगी तो वे एक बार फिर शिकायत लेकर अफसरों के चक्कर लगाने लगे लेकिन इस बार तो अफसरों का रवैय्या पहले से भी ज्यादा निराशाजनक निकला ।

मुख्यमंत्री को शिकायत मेल करें cmup@nic.in

शिकायतकर्ताओं ने कहा पहले तो सुभाष चौहान नाम के गुंडे और उसकी पत्नी-परिवार और उनके कुछ समर्थकों ने ही जमीन पर कब्जा किया हुआ था लेकिन जब तंत्र की नाकामी का खुलासा हो गया तो दो अन्य गुंडों धनवीर यादव और जयवीर यादव ने भी कॉलोनी के भीतर की सरकारी भूमि पर कब्जा करके चारदीवारी बना ली और छत भी बनवा डाली ।

शिकायतकर्ताओं ने भारी मन से बताया कि विगत दो वर्षों में नोएडा एथॉरिटी में हमने दर्जनों आरटीआई लगाईं लेकिन एक का भी उचित जवाब हमें नहीं दिया गया। कुछ जवाबों में तो एथॉरिटी की ओर से सुझाव तक दे डाले गये । शिकायतकर्ताओं नें बताया कि हमने सीएम कार्यालय को पहले भी मेल भेजे हैं और योगी जी को भी मेल किया है ,साथ ही एंटी भू माफिया पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करवाई है । अब देखतें हैं कि योगी जी का प्रशासन कुछ करता है या नहीं क्योंकि जिले के अफसर तो न फोन उठाते हैं न ही व्हाट्सएप देखते हैं और मिलने पर टरकाने वाले जवाब देते हैं ।                



 

 

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   Comments
धर्मेंन्द्र जैन,नोएडा
बेहतर होता संपादक जी पूरे नोएडा में हुए कब्जों पर और विस्तार से लिखते। ऐसे सैकड़ों मामले हैं।
 
रघोत्तम
यदि जन शिकायतों की अनदेखी हुई,तो सत्तारूढ़ दल को 2019 मॅहगा पड़ेगा।
 
Ravinder Singh Rana
This is an uniue case of bureacracy. CEO,DyCEO,DIG Enforcement,Project Engineer Circle 5,NoidaSHO Sector 71 Police Station ,SP City . Requested every one to take necessary action against unauthorised,illegal construction in Metro Apartment, Sector 71,Noid
 
Thakur Prem Singh
CM sahab is in POOJA in various temples.. He does not have time for law and orde
 
prasoon pankaj
शानदार रिपोर्ट