Thursday, November 15, 2018
सवर्णहंता एक्ट !!
रघोत्तम शुक्ल
राजनीतिक विश्लेषक एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी

कभी कांग्रेस ने यह अधिनियम पारित किया था। कथित दलितों ने खूब सताया सवर्णों को। जो कह दें वह सही;तुरंत जेल में ठूंसो सवर्ण को । जब उ.प्र.में मायावती और भाजपा की मिली जुली सरकार बनी, तो भाजपा ने ये प्रशासनिक आदेश  निकलवाये कि बलात्कार और हत्या यदि नहीं हुई है,तो यह ऐक्ट न लगाया जाय।


थोड़ी राहत मिली थी।आखिर सवर्ण भाजपा का वोट बैंक है और मायावती को कुर्सी प्रिय है।वह सरकार हटते ही फिर ढाक के तीन पात।

      
कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक प्रक्रियात्मक निर्णय दिया,जिसके अनुसार तुरन्त गिरफ्तारी न करके,एक सप्ताह में जांच करके प्रथम दृष्ट्या सही होने पर ही कार्रवाई करने का निर्देश दिया। वरिष्ठों की अनुमति भी अनिवार्य की तथा जमानत की गुंजाइश कर दी। बस कांग्रेस नीत विपक्ष ने पृथ्वी सिर पर उठा ली ।


अराजक माहौल सृजित किया। मोदी घबड़ा गये। पहले कोर्ट से ही पुनर्विचार की याचना की। उसके अमान्य होते ही,कानून पास कर दिया;पूर्ववर्ती सवर्ण उत्पीड़क स्थिति फिर ला दी। भाजपा के गगनविहारी नेतावों का यह सोच है कि सवर्ण जायेंगे कहां ? कोई इनकी बात नहीं कह रहा। अतःये तो वोट दे ही देंगे।



दलित वोट भी मिल जायेंगे;और फिर सरकार बना लेंगे! लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सवर्ण प्रबुद्ध होने के नाते सड़कों पर गुंडई तो नहीं करेगा,लेकिन भ्रमवश कुछ इधर उधर चले जायेंगे,बाकी मतदान करने ही नहीं जायेंगे। नोटबन्दी और जी.एस.टी.से क्षरित हुए वोट बैंक वाली भाजपा को यह सवर्ण क्षति महंगी पड़ेगी।

 

 

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