Monday, December 18, 2017
भारत की वैज्ञानिक-तकनीकि उपलब्धियां 2500 B.C.से शुरू होती हैं ।
शारदा शुक्ला
पत्रकार,लेखिका (पुस्तक कलम की कॉकटेल से साभार)

विश्व की दृष्टि में भारत हमेशा से धार्मिक और दार्शनिक लोगों का देश रहा है । भारत को विश्व का आध्यात्मिक गुरु भी कहा जाता है । भारत के प्रति विश्व के इस दृष्टिकोण में इतनी दृढ़ता रही है कि भारत की कोई अन्य उपलब्धि भी उसकी इस छवि में थोड़ा सा भी बदलाव नहीं ला सकी । कम से कम पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय तक तो भारत को विदेशों में साधुओं,सपेरों और रस्सी पर चलने वाले नटों का देश समझा जाता रहा । पश्चिमी देशों में भारत के बारे में फैली ऐसी भ्रांति से पंडित नेहरू को काफी शिकायत थी क्योंकि वे एक इतिहासवेत्ता भी थे और प्राचीन भारत की तमाम किस्म की उपलब्धियों से भी वाकिफ थे ।
                                    यह सच है कि भारत धर्मों और कई दार्शनिक पंथों की जन्मस्थली और पालना रहा है परन्तु विज्ञान,गणित,आयुर्वेद,खगोल,ज्योतिष और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भी उसकी उपलब्धियां कम नहीं रहीं हैं । प्राचीन भारत की वैज्ञानिक और तकनीकि उपलब्धियों की कहानी उतनी ही पुरानी है जितनी खुद हड़प्पा सभ्यता अर्थात् ढाई हजार साल ईसा पूर्व ।

अन्य महत्वपूर्ण लिंक - http://asi.nic.in/

भारत और पाकिस्तान के विशाल भू-भाग पर फैली हड़प्पा सभ्यता भवन निर्माण तकनीक की दृष्टि से काफी उन्नत थी । इस सभ्यता में 6 प्रमुख नगर थे जिनमें से मोहनजोदड़ो और लोथल भी शामिल थे । मोहनजोदड़ो वर्तमान में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पड़ता है । यहां से पुरातत्ववेत्ताओं को हड़प्पा काल के जो अवशेष मिले थे उनमें सबसे प्रमुख - एक वृहद स्नानागार या स्वीमिंग पूल है ।                                                                                              
                                          इस स्नानागार के जितने भाग में पानी भरा जाता था उसकी लंबाई-चौड़ाई 39/23 फुट और गहराई 8 फुट थी । ये स्नानागार पक्की ईंटों का बना था और ईंटों की जुड़ाई जिप्सम और बिटूमिनस से की गई थी । स्नानागार से खराब पानी के निकास के लिए भूमिगत नाली का भी निर्माण किया गया था । इस स्नानागार से हड़प्पा सभ्यता के लोगों की सिविल इंजीनियरिंग के ज्ञान संबंधी कई बातों का हमें पता चलता है जैसे कि ये लोग पकी ईंटों का प्रयोग जानते थे जो किसी अन्य समकालीन सभ्यता के लिए दुर्लभ थीं । साथ ही स्नानागार को जलरोधी या लीकप्रूफ बनाने के लिए जिप्सम व बिटूमिनस का प्रयोग किया गया था जो कि उच्चकोटि के प्राविधिक ज्ञान का प्रमाण है ।  

अन्य महत्वपूर्ण लिंक - http://nationalheritage.gov.pk/doam.html

(......शेष अगली कड़ी में....)
 

 

 

लेख पर दीजिए प्रतिक्रिया ।

 Yes      No
   Comments