Monday, December 18, 2017
दीपावली
रघोत्तम शुक्ल
लेखक,कवि एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी

कार्तिक कृष्ण अमावस्या की रात्रि है। सूचीभेद्य अंधकार होना चाहिये;किन्तु ऐसा प्रकाश फैला है कि प्रचण्ड मार्तण्ड की भास्वरता लज्जित हो रही है।असंख्य दीप प्रज्ज्वलित हो तम को परास्त कर रहे हैं।गणेश लक्ष्मी का पूजन हो रहा है।पटाखों के व्याज परिवेश अपना पुलक प्रस्फुटित कर रहा है। देव लोक की सिद्धि समृद्धि भारत भूमि पर उतर आई है।यह कैसी रात है ? सुरलोक में देवी

देवता वार्तालाप कर रहे हैं:---

     पूछतीं सुरों से देवियां,
           भूमि पै बड़ी उमंग है।
     स्वर्ग लोक का उड़ा उड़ा,
            नाथ आज क्यों सु-रंग है ?
      देवियो! न स्वर्ग में रही,
             सिद्धि,सम्पदा न संग है।।
      भूमि पै गणेश लक्ष्मी -
              जी की अर्चना अभंग है।
        सिद्धि के निधान हैं वहां
               वहीं सिंधु बाला है।
        हिन्द के हरेक गेह में,
                आज दीपमाला है।।


जी हां ! यह दीपावली का पर्व है।भारत के बड़े त्यौहारों में से एक।यहां प्रायः हर त्यौहार,पर्व किसी देवी देवता या महापुरुष से जोड़कर ही मनाया जाता है। दीपावली को श्रीराम की लंका विजय के उपरान्त अयोध्या वापसी से सम्बद्ध किया जाता है और आतिशबाजी छुटाने को उसी खुशी के इज़हार रूप भें।आइये देखते हैं कि धर्म ग्रन्थों के उल्लेखों के अनुसार इस कथन और परम्परा में कितना बल है।

                                                        वाल्मीकि रामायण में आये संदर्भ के अनुसार मूलतःराम का राजतिलक चैत्र मास,शुक्ल पक्ष,पुष्य नक्षत्र,में होने जा रहा था।कैकेयी के कोपभवन में जाने,राजा दशरथ द्वारा उन्हें मनाने और वरदान देने के परिणामस्वरूप राम को 14 वर्ष का वनवास दिया गया।सम्पूर्ण कार्य करके जब राम वन से वापस लौटे तो प्रयाग में भरद्वाज आश्रम में रुके और हनुमान जी को दूत के रूप में भरत के पास भेजा।उसी दिन 14वर्ष पूरे हो रहे थे और उल्लेखों के अनुसार  पञ्चमी तिथि थी।(वाल्मीकि रामायण/युद्धकाण्ड/124वां सर्ग/श्लोक-1) यही नहीं,अगले दिन पुष्य नक्षत्र भी था । अयोध्या वे षष्टी को पहुंचे और शीघ्र उनका राज्य तिलक हुवा।अतः कार्तिक कृष्ण अमावस्या का राम राजतिलक से कोई लेना देना नहीं है। वैसे भी कर्क लग्न में जन्में राम का राज्यारोहण यदि कर्क के स्वामी चन्द्रमा के अस्त होने की स्थिति में होता तो वे 11000 हजार वर्ष अखण्ड राज्य कैसे कर सकते थे?



                                 स्कन्द पुराण के अनुसार राम का राज्यारोहण वैशाख शुक्ल सप्तमी को हुवा।इसी तिथि को उनका वन गमन हुवा था।अतः षष्टी की रात्रि उनके वनवास की अवधि पूर्ण हो रही थी ।इसलिये उस दिन वे नन्दिग्राम में रुक गये।अयोध्या प्रवेश नहीं किये।वाल्मीकि रामायण और स्कन्द पुराण की गणना का मामूली अंतर इसलिये भी है कि पुराणों में मास गणना अमान्त पद्धति से होती है। यानी अमावस्या को मास का अंत माना जाता है।किसी भी दशा में कार्तिक अमावस्या को राम की अयोध्या वापसी /राज्यारोहण नहीं हुवा है।

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                           दीपावली एक विशुद्ध ऋतु पर्व है;और राम के नाम पर पटाखे फोड़ कर,हजारों टन बारूद जलाकर पर्यावरण प्रदूषित करना उचित नहीं है। दरअसल,इस समय तक बरसात पूरी तरह समाप्त हो चुकी होती है और शरद चल रही होती है।बरसाती प्रदूषण दूर करना होता है;साथ ही किसान को खलीफ के कुछ धान्य और तरकारियां मिल चुकी होती हैं,जो उसे समृद्ध कर देता है।अतःमनीषियों ने एक पर्व निर्धारित कर दिया।घरों की सफाई,लिपाई,पुताई की जाय। मिट्टी के डेलियों में कड़ुवा तेल भरकर दीपक जलाए जायॅ,जिससे कीट पतिंगे समाप्त हों।प्रकाश ज्ञान का प्रतीक है।बुद्धि और समृद्धि के देव,देवी श्री गणेश,लक्ष्मी की पूजा अर्चना हो,जिससे सात्विक आधारों से वैभव प्राप्त हो।नैतिकता की वृद्धि हो।


                                     काल गति से अब विकृतियां आ गई हैं।बारूद के विस्फोटों के पर्यावरणीय प्रदूषण,कर्ण कटु ध्वनि,मोमबत्तियों के जलाने से उत्सृजित कार्बन,बिजली का भारी प्रयोग रूप राष्ट्रीय क्षति,जुआ आदि।हमें संशोधन और परिष्कार करना होगा। आइये हम प्रदूषण मुक्त,अर्चना युक्त,नैतिक मूल्यों की वृद्धिकारी, ज्ञान वर्द्धक और भ्रष्टाचार कर्षक दीपावली मनाएं। आर्ष ग्रन्थ कहते हैं" संसार रूपी अंधकार में प्रवेश करने के लिये एक ऐसा दीपक जलाइये जिसमें, सत्य की डीयट,तप का तेल,दया की बाती हो और क्षमा की लौ निकल रही हो।"
        सत्याधारस्तपस्तैलं दया वर्ति:क्षमा शिखा।
        अंधकारे प्रवेष्टव्ये दीपो यत्नेन वार्यताम् ।।



 

 

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   Comments
shah Alam
Jayese ko tayesa.