Saturday, May 26, 2018
अजंता-एलोरा:कला और इंजीनियरिंग का बेजोड़ संगम
शारदा शुक्ला
पत्रकार,लेखिका (पुस्तक कलम की कॉकटेल से साभार)

प्राचीन भारतीय तकनीकि ज्ञान की कोई भी चर्चा अजन्ता एलौरा के बिना अधूरी सी लगती है ।
अजन्ता और एलौरा की गुफाएं अपने अति सुंदर चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध हैं । इन गुफाओं में आज जो हमे चित्र दिखाई देते हैं वे वस्तुत: कलाकारों की कई पीढ़ियों द्वारा निर्मित हैं और उन्हें वर्तमान स्वरूप देने में करीब छह या सात सौ वर्षों का समय लगा है । कुछ गुफाओं में बने चित्र यदि ईसा पूर्व शताब्दियों के हैं तो कुछ एक गुफाओं के चित्र छठवीं शताब्दी ईस्वी तक के भी हैं।
            


इन गुफाओं में चित्रकारी करने के लिए सबसे बड़ी समस्या प्रकाश के नितांत अभाव की थी । इन गुफाओं के अंधकार में चित्रकारी करना तो दूर देखना तक मुश्किल होता था । यदि रोशनी के लिए मशाल या चिराग जलाई जाती तो दीवारें काली पड़ जातीं और चित्र बनाना असंभव हो जाता ।  इस समस्या का निदान बडी बौद्धिक तीक्ष्णता के साथ निकाला गया ।



चमकीली धातुओं से बने बड़े ब़डे दर्पण सूर्य की रौशनी गुफाओं के द्वार के सामने इस प्रकार लगाये गए कि ताकि सूर्य की तेज रौशनी परावर्तित होकर अंधेरी गुफा में जा सके तथा चित्रकार का काम करना संभव हो पाए । इस उपाय को करने के उपरान्त ही अजन्ता एलौरा की गुफाएं अपने कलात्मक महत्व के लिए इतिहास के आलोक में आ सकीं ।    

 

 

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