Monday, December 18, 2017
कालसर्प और पितृदोष दूर करने का सरल उपाय
ब्यूरो रिपोर्ट


शिव की साधना से मिलती है मुक्ति

किसी जातक को यदि जन्म पत्रिका में कालसर्प, पितृदोष एवं राहु-केतु तथा शनि से पीड़ा है उसे शिव ही शांत कर सकते हैं। मानव के जीवन में आने वाले कष्ट किसी न किसी पाप ग्रह के कारण होते हैं। भगवान शिव ही आशुतोष हैं अर्थात शीघ्र संतुष्ट होने वाले । शिव को मोहने वाली अर्थात शिव को प्रसन्न करने वाली शक्ति है गायत्री मंत्र।
               
 

जो जातक मानसिक रूप से विचलित रहते हैं या ग्रहण योग है। जिनको मानसिक शांति नहीं मिल रही हो तो उन्हें भगवान शिव की गायत्री मंत्र से आराधना करनी चाहिए। क्योंकि कालसर्प, पितृदोष के कारण राहु-केतु को पाप-पुण्य संचित करने तथा शनिदेव द्वारा दंड दिलाने की व्यवस्था भगवान शिव के आदेश पर ही होती है। इससे सीधा अर्थ निकलता है कि इन ग्रहों के कष्टों से पीड़ित व्यक्ति भगवान शिव की आराधना करे तो महादेव उस व्यक्ति की पीड़ा दूर कर सुख पहुंचाते हैं। भगवान शिव की शास्त्रों में कई
प्रकार की आराधना वर्णित है परंतु शिव गायत्री मंत्र का पाठ सरल एवं अत्यंत प्रभावशील है।

ऐसे करें मंत्र का जाप

इस मंत्र का जाप करने का कोई विशेष विधि-विधान नहीं है। इसे किसी भी सोमवार से प्रारंभ कर सकते हैं। साथ में सोमवार का व्रत करें तो श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त होंगे। शिवजी के सामने घी का दीपक लगाएं। जब भी यह मंत्र करें एकाग्रचित्त होकर करें। पितृदोष, एवं कालसर्प दोष वाले व्यक्ति को यह मंत्र प्रतिदिन करना चाहिए।  सामान्य व्यक्ति भी करे तो भविष्य में कष्ट नहीं आएगा। इस जाप से मानसिक शांति, यश, समृद्धि, कीर्ति प्राप्त  होती है।

इस मंत्र का करें जाप

ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।

 

 

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