Tuesday, October 16, 2018
2017 के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के दूरगामी परिणाम होंगे - ऐश्वर्या राय भाटी, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड , सुप्रीम कोर्ट
संजय कुमार
अधिवक्ता एवं पत्रकार

वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसले आनेवाले कई मसलों पर दूरगामी प्रभाव डालेंगे। निजता का अधिकार मौलिक अधिकार होने के बाद कई मामलों पर आनेवाले दिनों में असर डालेंगे । वहीं ट्रिपल तलाक पर रोक के फैसले न केवल धार्मिक आड़ पर मानवाधिकार हनन रोकने में सहायक होगा बल्कि ये महिलाओं की स्वतंत्रता के लिए एक रास्ता खोलेगा । सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2017 में लिए गए फैसलों का आनेवाले वर्ष 2018 में कितना असर होगा इस बारे में सुप्रीम कोर्ट की वकील और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड ऐश्वर्या भाटी से संजय कुमार की बातचीत के प्रमुख अंश-

संजय कुमार - सुप्रीम कोर्ट का सबसे बड़ा फैसला निजता के अधिकार को लेकर है । सुप्रीम कोर्ट के ऐसे बहुत कम फैसले होते हैं जो सर्वसम्मत होते हैं । इस फैसले में सबसे महत्वपूर्ण है कि नौ सदस्यीय संविधान बेंच ने सर्वसम्मत फैसला दिया कि निजता हमारा मौलिक अधिकार है । अन्यथा संविधान बेंच में बहुत कम फैसले सर्वसम्मत होते हैं । इस फैसले का सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों में दूरगामी असर होगा ।


एडवोकेट ऐश्वर्या - इस फैसले का सबसे दूरगामी असर ये होगा कि फेसबुक और व्हाट्सएप पर जो डाटा शेयरिंग हो रही है उस पर एक रेगुलेशन होगा । अभी तक व्हाट्सएप और फेसबुक ये कह रहे थे कि भारत में निजता मौलिक अधिकार नहीं है ।

लेकिन निजता के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उनकी मुख्य बहस ही कमजोर हो गई है ।


 संजय कुमार - सुप्रीम कोर्ट का दूसरा बड़ा फैसला ट्रिपल तलाक का है । कोर्ट में इस बात की बार-बार दलील दी गई कि ये पर्सनल लॉ है आप इसमें दखल मत दीजिए । ये पूरी तरह संविधान के जरिये प्रोटेक्टेड है । ये रही कि जब कोर्ट ने इसे
रेफरेंस के लिए भेजा था तो ट्रिपल तलाक,बहुविवाह और निकाह हलाला को शामिल किया था लेकिन संविधान बेंच ने केवल ट्रिपल तलाक पर ही फैसला दिया । 





ऐश्वर्या राय भाटी,एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड
सुप्रीम कोर्ट                                            


एडवोकेट ऐश्वर्या - इस फैसले के जरिये ये बात साफ हो गई कि अगर मौलिक अधिकार की आड़ में धर्म आता है तो हम ये नहीं कह सकते कि ये पर्सनल लॉ है हम मौलिक अधिकार को प्रोटेक्ट नहीं कर सकते हैं । इसका असर ये भी होगा कि कोई दूसरे धर्म की आड़ में भी मौलिक अधिकार का हनन नहीं कर सकता । पारसी धर्म की महिला ने अपने अधिकार की लड़ाई के लिए जो सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई उसमें उसने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक में महिलाओं के पक्ष में फैसला दिया है इसलिए हमारी हिम्मत बढ़ी कि आप हमारी भी बात सुनेंगे । ट्रिपल तलाक के ही फैसले का असर है कि पारसी ट्रस्ट ने कहा कि महिलाओं को दूसरे धर्म की शादी के बाद भी उन्हें अपने माता-पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति होगी ।


संजय कुमार - सुप्रीम कोर्ट का नाबालिग पत्नी से यौन संबंध बनाने को रेप करार देने का फैसला किस तरह से मील का पत्थर साबित होगा ।


एडवोकेट ऐश्वर्या - इस फैसले से बाल विवाह पर रोक लग सकती है । लेकिन इसमें व्यावहारिक ये है कि जो महिला आर्थिक रुप से सबल नहीं होगी वो कोर्ट में केस लड़ने नहीं आएगी । केवल अधिकार देने से नहीं होगा उन्हें उसके लिए तैयार करना होगा । हो सकता है कि इस फैसले का दुरुपयोग हो । मैट्रिमोनियल लॉ की एक कहावत है कि जब तक पति पत्नी में प्यार है तब तक कानून नहीं चलता है । लेकिन जैसे ही प्यार उनके दरवाजे से बाहर जाता है कानून खिड़की से अंदर आ जाता है ।


संजय कुमार - केरल लव जिहाद मामले में अभी फैसला नहीं आया है। लेकिन केरल हाईकोर्ट में अपनी तरह का ये पेचीदा मामला आया था जिसमें बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करने के बाद हदिया की शादी हुई । पहले से वे एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे ।

एडवोकेट ऐश्वर्या - अक्सर ऐसा होता है कि लड़का और लड़की एक-दूसरे को जानते हैं और अपनी पसंद से शादी कर लेते हैं । और तब लड़का या लड़की के पिता बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करते हैं । लेकिन इस मामले में हदिया अपने पति को जानती तक नहीं थी और धर्म परिवर्तन कर एक दूसरी लड़की के साथ रह रही थी । ये एक सामान्य बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका नहीं थी । इसमें याचिका दाखिल करने के बाद हदिया की शादी हुई । इस पर उसके पिता का कहना है कि उसकी बेटी का इस्तेमाल आतंकवादी संगठनों के लिए किया जा रहा है ।



 

 

इस साक्षात्कार पर अपनी राय लिखें ।

 Yes      No
   Comments