Monday, August 26, 2019
क्यों छोड़ते हैं काबा में कंकरियां ?
रघोत्तम शुक्ल
लेखक,साहित्यकार एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी

मुस्लिम बंधुओं के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ मक्का (काबा) में तवाफ (परिक्रमा) और कंकरिया

छोड़ने का विधान है।सूफा और मर्वह पर्वतों के बीच भक्तगण दौड़ते हैं । कहते हैं सृष्टि

के आदि में जब पृथ्वी जलमग्न थी तो मक्का में ही सर्वप्रथम भूमि के दर्शन हुए । यहां

स्थित मस्जिद में काला प्रस्तरखंड रखा है ,जो शिवलिंग ही है । "संगे अस्वद" और

शिवलिंग केवल संप्रदाय विशेष द्वारा दिए गए महादेव (ईश्वर) के नाम भेद हैं। यही

कारण है कि हज के कार्यक्रम में अक्षतों की भांति कंकरिया छोड़ते हैं और मूर्ति पूजा के

समर्थक ना होते हुए भी परिक्रमा करते हैं ।


इतिहासकारों ने इस लिंग को मक्केश्वर शिव की संज्ञा दी है । प्रसिद्ध इतिहासकार

कर्नल टाड ने भी इसे शिवलिंग कहा है। हजरत

इब्राहिम ने सफा और मर्वह पर्वतों पर दो बुत रखवाये

(शिव लिंगों की स्थापना की) थे क्योंकि उनकी पत्नी

हजरत हाजिर जब अपने दूध पीते बच्चे के लिए

अकेली वहां रेगिस्तान में जल की तलाश कर रही थीं

तो शीश गणधारी शिव की कृपा से वहां एक सुंदर

जलाशय (चश्मा) प्रगट हो गया जिसे "जम जम" कहते हैं ।


बाद में मूर्ति पूजा का विरोध होने के कारण बुत (शिवलिंग) तो हटा दिए गए किंतु

हजरत मोहम्मद साहब के निर्देशानुसार परिक्रमा अब भी होती है । 



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बताया जाता है कि "जम जम" में शिवलिंग अभी विराजमान है।  इस प्रकार काबा तीर्थ

में कंकरिया फेंकना और परिक्रमा करना शिवार्चना का ही विधान है ।


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भारतवर्ष की भौगोलिक सीमाएं और धार्मिक मान्यताएं अतीत में बहुत विस्तृत थीं।

ईरान में हुफरात तट पर सूर्य मंदिर में मिलने वाली वंशावलियों में श्रीराम का नाम आता

है । महाभारत के सभा पर्व के अनुसार अर्जुन ने प्राग्ज्योतिषपुर के राजा भग्दत्त

को जीता था जिसके राज्य में चीन भी था । भारतीय पुराणों में वर्णित मुक्तिनाथ

(शालग्राम क्षेत्र) और शिव विषपान स्थल (पशुपतिनाथ) अब नेपाल में है।

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(डिस्क्लेमर - ये लेखक के अपने विचार और तथ्य हैं , वेबसाइट इनका समर्थन या विरोध नहीं करती है ।)

 

 

क्या आप मानते हैं कि अतीत में विभिन्न प्रकार के धर्म प्रचलित नहीं थे ?

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It is very nice story and very nice writing.

Ravi Kumar

Very Good and Healthy Article

Abhishek Tewari

Very Good and Healthy Article

Abhishek Tewari

Very Good and Healthy Article

Abhishek Tewari

Chalo sab loog Surkanda Devi

Abhishek Tewari