Monday, August 26, 2019
जो लड़े दीन के हेत...(दूसरी किश्त)
आशुतोष शुक्ला
वरिष्ठ पत्रकार

छठवें गुरु हरगोविंद ने सिखों को सैनिक रूप में संगठित करना प्रारंभ कर दिया। गुरु हरराय सिखों के सातवें गुरु हुए जो कि हरगोविंद के पौत्र थे । इनके उपरान्त गुरु हरकिशन 8 वें गुरु हुए जो कि हरराय के पुत्र थे । इन दोनो गुरुओं के कार्यों एवं योगदानों को गुरु तेग बहादुर की अक्षुण्य कीर्त ने आच्छादित कर दिया। तेगबहादुर हरगोविंद के सबसे छोटे पुत्र तथा नौवें गुरु थे । तेग बहादुर के व्यक्तित्व से जाट, कश्मीरी हिंदू तथा कुछ संख्या में मुस्लिम भी प्रभावित हुए तथा सिख पंथ के समतावादी सिद्धांतों से अभिभूत होने लगे ।


औरंगजेब तेग बहादुर की बढ़ती लोकप्रियता एवं प्रभावों से संतुलन खो बैठा और गुरु विद्रोह भड़काने का आरोप लगाकर उन्हें मृत्युदंड दे दिया । गुरु ने औरंगजेब को जवाब दिया  - "सिर दिया सिर्र न दिया " । जिस स्थान पर गुरु तेग बहादुर की शहादत हुई वहीं पर आज भी गुरुद्वारा साहिब शीशगंज स्थित है और गुरु तेग बहादुर की शहादत की याद ताजा करवाता है।


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अंतिम और दसवें गुरु गोविंद सिंह तेग बहादुर के पुत्र थे । गुरु गोविंद सिंह ने पांच रत्न धारण किए- "केश", "कंघा", "कड़ा", "कृपाण", "कक्षा" और इस प्रकार एक सच्चे सिख को एक विशिष्ट पहचान एवं स्वरूप प्रदान किया जो कि आज तक ज्यों की त्यों अनुजीवित है । यही नहीं पंच प्यारों का भी उन्होंने चयन किया । इनमें "दयाराम", "धर्मदास","साहिब चंद कहार", "भोखम चंद छिम्ब" नामक पांच शूरवीर शामिल थे ।

इस लेख की पहली किश्त पढ़ें,इस लिंक पर -


इन व्यक्तियों को "खालसा" कहा गया । खालसा सामान्यता तो सिख बंधुत्व का अभिप्राय रखता है परंतु इसका गूढ़ार्थ इसके प्रत्येक अक्षर में छिपा हुआ है । "खअलसअ" में "ख" अक्षर का अर्थ है "खुद" (मैं स्वयं), "अ" अक्षर का अर्थ है "अकाल पुर्ख" एवं "ल" अक्षर का अर्थ है - लव्बैक (आदेश हो, मैं हाजिर हूं या मैं तत्पर हूं) । इसी प्रकार "स" अक्षर एवं "अ" अक्षर का अर्थ है क्रमशः "सिंह" (भक्त या उपासक) और "आजादी" । इस प्रकार गुरु ने एक त्यागी एवं बलिदानी पंथ के निर्माण का कार्य पूर्ण किया । इसके अलावा उन्होंने "गुरु ग्रंथ साहिब" को भी पूर्ण किया तथा वर्तमान स्वरूप दिया ।

गोविंद सिंह ने "विचित्र नाटक" , "चंडी चरित्र" , "दशम ग्रंथ" नामक पुस्तकें लिखकर अपनी साहित्यिक सृजननशीलता का परिचय दिया । उन्होंने घोषित किया कि गुरु परंपरा पूर्ण हो चुकी है तथा गुरु ग्रंथ साहिब को ही हमेशा के लिए सिख पंथ हेतु एक मार्ग निर्देशक के रूप में स्वीकार किया । सिख गुरुओं में सभी सुंदर विचारों को अंगीकार करने की सहिष्णुता विद्यमान थी । इसका उदाहरण यह है कि ग्रंथ साहिब में फरीद बाबा , कबीर , नामदेव, सूरदास, रामानंद, धन्ना आदि धर्म एवं जाति के संतों की कविताएं शामिल हैं

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सिख गुरुओं ने सिख पंथ की बुनियाद ऐसे त्यागी, बलिदानी एवं आत्मोत्सर्ग के सिद्धांतों पर रखीं जिसकी तासीर से बंदा बहादुर ,महाराणा रणजीत सिंह, भगत सिंह,उधम सिंह जैसे देश के महान सपूत युग युग में बारंबार सिख पंथ में जन्म लेते रहे और भविष्य में भी लेते रहेंगे और देश व समाज को सही ऊर्जा प्रदान करते रहेंगे । यही सिख पंथ से अपेक्षा की जाती है।

 

   Comments


It is very nice story and very nice writing.

Ravi Kumar

Very Good and Healthy Article

Abhishek Tewari

Very Good and Healthy Article

Abhishek Tewari

Very Good and Healthy Article

Abhishek Tewari

Chalo sab loog Surkanda Devi

Abhishek Tewari